अब के हम बिछड़े तो शायद ख्वाबों में मिलें, जैसे सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

अब के हम बिछड़े तो शायद ख्वाबों में मिलें, जैसे सूखे हुए फूल किताबों में मिलें

टिप्पणियाँ